Rakesh Kumar

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लेखनी कहानी -17-Nov-2021

प्रेम-पत्र सुना है न तुमने, तुमने उन्हें जलते हुए देखा होगा, धूल खाते हुए देखा होगा, किसी ड्रोज़ मे सालों से वैसे ही पड़े हुए देखा होगा, या सड़क पर उसके टुकड़ो को हवा के साथ-साथ उड़कर कभी अपने पैरों के नीचे रौंद जाते भी देखा होगा, लेकिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी प्रेम-पत्र कभी मरा नहीं करते...

इनकी ज़िंदा रहने की इक्षाशक्ति प्रेम करने वालों की जीने की इक्षाशक्ति से कहीं ज्यादा प्रबल होती है.. जब ये प्रेमी या प्रेमिका के द्वारा लिखे जाते हैं, और फ़िर जब इसे पाने वाले तक पहुँच जाते हैं, तब ये दोनों के ज़हन में किसी बीज की तरह ही दफ़न हो जाते हैं, और हर दिन किसी न किसी रूप में अंकुरित हो जाया करते हैं.. उस प्रेम-पत्र की कोई एक बात ज़हन में गूँज जाने के साथ ही..ये सिलसिला ताउम्र चलता रहता है, हाँ इनके अंकुरित होने के समय मे वक़्त के साथ बदलाव होता जाता है, लेकिन इसे पूरी तरह नष्ट किया जा सके, ऐसा नहीं हो सकता..

कुछेक मर्तबा प्रेम-पत्र लिखे तो जाते हैं, मगर रख दिये जाते हैं वापस अलमारी के किसी एक ड्रोज़ में बिना भेजे ही, ये भी प्रेम-पत्र कि मृत्य नहीं होती है, ऐसे प्रेम-पत्र एक आस लेकर अलमारी में सदियां गुज़ार दिया करते हैं किसी दिन उसकी मंज़िल तक पहुँच जाने को..इन्हें लिखने वाला भले ही उन्हें छोड़कर अपनी ज़िंदगी मे कहीं आगे बढ़ गया हो, लेकिन बाहर की दुनिया से अंजान ये प्रेम-पत्र अपने आप को ज़िंदा रखते हैं, रेगिस्तान में नागफ़नी की तरह ही..

उन प्रेम-पत्रों की कभी मृत्यु नहीं होती है, जिनके ज़वाब कभी नहीं आया करते हैं, उन प्रेम-पत्रों की कभी मृत्यु नहीं होती है जो गलत पते की वजह से अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाते हैं, उन प्रेम-पत्र के पीछे असली प्रेम की भी मृत्य कभी नहीं होती है जिनके प्रेम-पत्र रास्ता भटक जाया करते हैं, प्रेम-पत्रों की मृत्यु तब होती है, जब उसे पाने वाला, जानबूझकर अपना पता बदल दिया करता है, प्रेम-पत्र बिल्कुल सही चौखट पर पहुँच कर भी वापस बस इसीलिए आ जाते हैं कि उसे पाने वाले ने अपना पता बदल दिया..

वो प्रेम-पत्र, जिनकी मंज़िल ने जानबूझकर पता बदला होता है, तब प्रेम-पत्रों के उस तक पहुँच पाने की आस उसकी चौखट से लौटने के ठीक पहले ही टूट जाया करती है..उस रोज़ उन प्रेम-पत्रों की मौत हो जाया करती है..
हाँ मैंने भी मेरे प्रेम-पत्र को बस ऐसे ही मरते देखा है..

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